Friday, December 5, 2008

क्या जनता सबक सिखा पाएगी?

मुंबई के आतंकी हमलों ने देश के लोगों को एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या सरकार उनको सुरक्षा प्रदान कर सकती है। मामला सिर्फ सुरक्षा का नहीं है। मुंबई में जिस तरह से जनता सड़कों पर उतरी है उससे तो यही लगता है कि वह बदलाव चाहती है। लेकिन जनता किस तरह का बदलाव चाहती है यह समा में नहीं आ रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे पहले भी जनता सड़कों पर उतरी थी। लेकिन मामला दो चार दिन में शांत हो जाता है और उसी जनता को उन सब मामलों के बारे में कोई जानकारी भी नहीं रहती। आखिर ऐसा क्यों होता है? लोग सड़कों पर उतरने के कुछ दिनों बाद ही सबकुछ भूल क्यों जाते हैं?

मैं जनता का विरोध नहीं करना चाहता। न ही यह कहना चाहता हूं कि जनता विरोध न करे। लेकिन नाचने गाने वालों और अपराधियों को चुनने वाली जनता को इस बात का नैतिक अधिकार ही नहीं है कि वह किसी सरकार को नाकामी पर उसे कोसे। हाथ में मोमबत्तिया लेकर देश के नेताओं के प्रति आग उगलने वाली यही मध्यमवर्गिय जनता है जो वोट डालने तक नहीं जाती है। इसमें से कुछ लोग होंगे जो यह दावा कर सकें कि वे वोट डालते हैं, लेकिन किसी बड़ी वारदात को कोई कितने दिनों तक याद रखता है यह सबको पता है।

मुंबई में हुए धमाके के बाद देश भर में लोगों ने मोमबत्तियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। मैं उनके विरोध या फिर उनके गुस्से पर कोई टिप्पणी नहीं कुरूंगा, लेकिन इतना जरूर कहुंगा कि दिल्ली में भी कुछ दिनों पहले आज तक समाचार चैनल की एक पत्रकार की हत्या कर दी गई। उस समय भी लोगों में रोष था। रोष जायज भी था, लेकिन उनमें से अधिकांश लोगों को यह पता भी नहीं होगा कि आखिर उस पत्रकार की मौत की जांच कहां तक पहुंची। आखिर ऐसा क्यों है। हम जबकि लोकतंत्र में रहते है और सारे अधिकार जनता के पास तो क्या इस तरह की जनता सरकार से जवाब मांग सकती है? क्या ऐसी जनता किसी नेता को सबक सीखा पाएगी?

1 comment:

Suresh Chandra Gupta said...

जनता सरकार से हर समय जवाब मांग सकती है. यह जनता का अधिकार है. कुछ लोग वोट डालने नहीं जाते इस से जनता का यह अधिकार छिन नहीं जाता. मोमबत्ती जलाना उन लोगों के प्रति अपनी श्रद्धांजलि प्रकट करना है जो सरकार की नाकामी की वजह से मारे गए. यह सरकार पूरी तरह से नाकारा साबित हो चुकी है. महाराष्ट्र में सीएम के पद के लिए कांग्रेसी नेता जो घटिया व्यवहार कर रहे हैं उस से यह साबित होता है कि इन्हें इतने निर्दोषों की जान जाने से कुछ लेना-देना नहीं है, कोई सहानुभूति नहीं है इन्हें उन परिवारों से जिन्होनें अपनों को इसलिए खो दिया क्योंकि यह नेता नालायक निकले. आज देश पर आतंकवाद से बड़ा खतरा यह नेता हैं, इन्हें हर हालत में हटाना चाहिए.