Friday, October 21, 2011

Thursday, October 6, 2011

अब बदले तो जग बदले

कहां हैं पटेल की टीम में उनके लोग

मृगेंद्र पांडेय

छत्तीसगढ में प्रदेश कांग्रेस कमेटी का गठन अध्यक्ष नंदकुमार पटेल ने कर दिया। छोटी और सबको खुश करने वाली कार्यकारिणी बनाकर पटेल ने यह संकेत देने की कोशिश की कि वे किसी से टकराव लेने के मूड में नहीं हैं। चुपचाप शांतिपूर्वक पूरे प्रदेश में पहले अपना जनाधार बनाया जाए फिर पूरी तरह से अपनी टीम बनाई जाए। यही कारण है कि पटेल की कार्यकारिणी में एक भी उनका आदमी नहीं है। उपाध्यक्ष और महासचिव में किसी भी नेता को पटेल का शार्गिद नहीं कहा जा सकता। तो क्या पटेल की यह कार्यकारिणी वरिश्ठ नेताओं के दबाव में बनाई गई कार्यकारिणी कही जाएगी। क्या पटेल बिना कोई रिश्क लिए प्रदेश अध्यक्ष बने रहना चाहते हैं।

जब तक नंदकुमार पटेल वरिश्ठ नेताओं के दबाव से बाहर नहीं आएंगे, तब तक वे प्रदेश में सुस्त पडी कांग्रेस में जान नहीं डाल सकते। इन्ही नेताओं के कारण पार्टी का बेड गर्क हुआ है। अगर ये वरिश्ठ नेता इतने ही काबिल होते तो आदिवासी क्षेत्र, जो कभी कांग्रेस का गढ माना जाता था, वहां पार्टी को चार सीट निकालने के लिए संघर्श करना पडता। पटेल ने इससे पहले जिलाध्यक्षों की घोशणा में भी सभी नेताओं को साधने का प्रयास किया। बाकी जिलाध्यक्ष की घोशणा इसलिए नहीं हो पा रही है क्योंकि ये नेता अपने लोगों को बनाने के लिए दबाव बनाए हुए हैं। उपाध्यक्ष और महासचिव बनाने में पटेल ने विद्या भैया, जोगी, महंत और वोरा के बीच संतुलन साधा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि चार गुटों में बंटी कांग्रेस में क्या पटेल कोई करिश्मा करके आने वाले समय में अपना कोई गुट बना पाते हैं।

राज्य गठन के बाद से प्रदेश कांग्रेस में तीन अध्यक्ष ऐसे बने जो अपना कोई गुट नहीं बना पाए। रामानुजलाल यादव, धनेंद्र साहू और सत्यनारायण शर्मा। ये तीनों अध्यक्ष अपने क्षेत्र में ही सिमट कर रहे गए। प्रदेश स्तर पर न तो उनकी टीम तैयार हुई, न ही उन लोगों ने कोई टीम बनाने के लिए संघर्श ही किया। इसका परिणाम यह हुआ कि लंबे समय से जो चार गुट प्रदेश में चले आ रहे थे, वहीं बरकरार रहे। श्यामचरण शुक्ल की मौत के बाद उनके बेटे अमितेश शुक्ला विधायक तो बन गए, लेकिन अपने पिता की वसीयत को संभाल नहीं पाए। अब नंदकुमार पटेल के सामने भी यही संकट है। इस संकट को पटेल शुरुआती दिनों में ही पहचान लेंगे तो अपना कार्यकाल पूरा करते-करते प्रदेश स्तर के नेता और प्रदेश स्तर की अपनी टीम बनाने में जरुर सफल हो जाएंगे।

यह लेख लिखने के बाद ही जानकारी मिली कि प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रहे रामानुजलाल यादव का निधन हो गया है। भगवान उनके परिजनों को शोक की घडी में सांत्वना प्रदान करें।

Wednesday, October 5, 2011

विजन 2013 के महारथी

मृगेंद्र पांडेय
छत्तीसगढ कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल ने अपनी कार्यकारिणी घोशित कर दी। इस कार्यकारिणी 2013 में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की नैया पार कराने का जिम्मा है। हो भी क्यों ना। पिछले दो चुनाव में भाजपा ने विधानसभा में कांग्रेस को इस लायक भी नहीं छोडा कि वे अपने मुददों पर बहस करा सके। इसके पीछे एक बडा कारण भापा कांग्रेस का आपसी समझौता हो सकता है, लेकिन नंदकुमार से प्रदेश के आम आदमी को भी उम्मीद थी। इस उम्मीद पर वे खरे नहीं उतरे हैं। उनकी टीम में एक भी ऐसा चेहरा नहीं है, जो पार्टी का कददावर पालिटिकल फेस हो। जो कोई बडा आंदोलन करके जनाधार में परिवर्तन लाने का माददा रखता हो। जो भाजपा सरकार की ओर से बांटे जा रहे दो रुपए किलो चावल और पांच रुपए किलो चना की काट ला सके। तो फिर क्या विजन 2013 के ये महारथी कांग्रेस के रथ को डूबो देंगे।

छत्तीसगढ कांग्रेस में संक्रमण काल का दौर है। एक पीढी कांग्रेस से दूर हो रही है। मोतीलाल वोरा, विद्याचरण शुक्ला, अजीत जोगी और सत्यनारायण शुक्ला अब सक्रिय राजनीति के लिए पूरी तरह फिट नहीं रह गए। अब नए सिरे से कांग्रेस की राजनीति तय करने की जरुरत थी। नंदकुमार पटेल पर अगले 20 साल को देखते हुए कार्यकारिणी का गठन करने की जिम्मेदारी थी। जिन लोगों को पटेल ने अपनी कार्यकारिणी में तवज्जो दिया है, वह इस कार्यकारिणी में तो पटेल के साथ चल सकते हैं, लेकिन कांग्रेस की नैया पार करने में कारगर नहीं होंगे। पटेल ने सात उपाध्यक्ष को अपनी टीम में शामिल किया है, इसमें से हंसराज भारद्वाज, केके गुप्ता, प्रदीप चौबे, पुश्पा देवी सिंह, टीएस सिंहदेव वरिश्ठ तो हैं, लेकिन अपने क्षेत्र के बाहर कोई खासा जनाधार नहीं है। प्रदीप चौबे तो कई चुनाव भी हार चुके हैं। इनसे कांग्रेस अगर कोई उम्मीद करती है, तो वह अपने साथ ही धोखा करेगी।

पटेल ने 11 महासचिव बनाए। इसमें से देवव्रत सिंह को छोडकर कोई भी नेता प्रदेशस्तरीय जनाधार वाला नहीं है। देवव्रत इससे पहले युवक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं, इसलिए उनकी प्रदेश के युवा नेताओं में ठीक-ठाक पकड है। रायपुर से रमेश वल्यानी, सुभाश शर्मा और विधान मिश्रा को महासचिव बनाया गया है। ये तीनों नेता राजधानी की किसी भी विधानसभा सीट से चुनाव जीतने की स्थिति में नहीं है। सुभाश शर्मा और विधान मिश्रा पर दूसरे तरह के भी कई आरोप हैं। अरुण वोरा, भूपेश बघेल, फुलोदेवी नेताम, पदमा मनहर और चंद्रभान बरुमते भी प्रदेश स्तर पर कोई खास पकड नहीं रखते हैं। अरुण वोरा दो बार चुनाव हार चुके हैं। मोतीलाल वोरा के बेटे होने के अलावा उनमें राजनीतिक पकड कोई खास नहीं है। शिव डहरिया आदिवासी नेता हैं और अजीत जोगी के करीबी हैं। इसके कारण इनको जगह मिली है। कुल मिलाकर कांग्रेस की यह भविश्य की टीम कुछ खास करामात दिखा पाएगी, यह कहपाना मुश्किल है। राजनीतिक पंडित भी यह कह रहे है कि कांग्रेस में कोई चमत्कार ही रमन के रणबांकुरो को धूल चटा पाएगा।

Saturday, October 1, 2011

चरित्रशील लोग प्रबल करेंगे लोकशाही

सवाल – अन्ना आपने पहले भी कहा था कि आप कोई राजनीतिक पार्टी नहीं बनाएंगे। तो फिर आप करेंगे क्या। आप किन लोगों का प्रचार करना चाहते हैं।

अन्ना – मैं कोई पक्ष और पार्टी में नहीं जाऊंगा, न मैं कोई पक्ष निकालूंगा, न राजनीति में जाऊंगा। कर्मण्येवादिकारस्तु महाफलेषु कदाचन। निष्काम कर्म यही भगवान की पूजा है। यह सोचकर मैं करते रहूंगा लेकिन कई लोगों का प्रश्न है कि आप राजनीति में नहीं जाएंगे तो इसको कैसे बदलेंगे। इसलिए मैं ये सोचा है कि कई तरुण जो युवक हैं उनको ये आह्वान किया है कि आप चरित्र को संभालो, अपने आचार विचार शुद्ध रखो, जीवन निष्कलंक रखो, जीवन में थोड़ा त्याग करो, अपमान पीने के लिए शक्ति रखो और दिया के मुताबिक जलते रहो, समाज के लिए, देश के लिए। और जब मैं देखूंगा 2-3-4 साल में कि देश में ये-ये युवक इतना शानदार काम कर रहे हैं उस टाइम पर ऐसे युवकों को मैं बताऊंगा election के लिए खड़े हो जाओ। पक्ष और पार्टी में मत जाओ। Independent खड़े हो जाओ। और ऐसे युवकों का प्रचार करने के लिए मैं खुद जाऊंगा। मैं पक्ष पार्टी नहीं निकालूंगा। लेकिन ऐसे युवक, चरित्रशील युवक ये विधानसभा-लोकसभा में जाने जरूरी हैं। ये पवित्र मंदिर हैं लोकशाही के। ऐसे पवित्र मंदिर में पवित्र लोगों को जाना चाहिए। आज हमारी संसद की क्या हालत है। 150 लोग दागी हैं तो क्या होगा इस देश का। इसलिए मैं सोच रहा हूं कि ऐसे लोग जो चरित्रशील लोग हैं ऐसे लोगों का उसमें जाना बहुत जरूरी है। उससे हमारी लोकशाही प्रबल होगी। सुदृढ लोकशाही का निर्माण होगा। और देश के लिए उज्जवल भविष्य मिल जाएगा उसमें से ऐसे मुझे विश्वास लगता है। मेरा आशास्थान वो युवक हैं।

Saturday, September 24, 2011

कांग्रेस का बडा खुलासा





कांग्रेस का बडा खुलासा





कांग्रेस का बडा खुलासा





कांग्रेस का बडा खुलासा






अमर अग्रवाल इस्तीफा दे या मुख्यमंत्री उन्हें हटाये-प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष

रायपुर 24.09.2011/

वाणिज्य-कर मंत्री अमर अग्रवाल द्वारा दस्तावेजी प्रमाण देने की चुनौती को स्वीकार करते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नंद कुमार पटेल ने आज संलग्न दस्तावेज जारी करते हुए मांग की है कि अमर अग्रवाल इस्तीफा या मुख्यमंत्री उन्हें हटाएं। संलग्न दस्तावेजों में 17 करोड़ 35 लाख की कर वसूली के लिए संचेती की संपत्ति और बैंक खातो के कुर्की आदेश, इस संपत्ति को वापस किये जाने हेतु किया गया आवेदन और छत्तीसगढ़ विधानसभा में 8 मार्च 2011 को वाणिज्य कर मंत्री अमर अग्रवाल का उत्तर है कि कोई करारोपण नहीं किया गया है. दुर्ग बाई-पास सडक का निर्माण 1999 से 2003 के मध्य किया गया। विभाग को 2005-06 तक 17 करोड़ 35 लाख की रूपयों की वसूली करनी थी। इस वसूली के लिए विभाग को षिवनाथ इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के 21 बैंक खाते सील करने पड़े। कुर्की की कार्यवाही की गई। 15-09-2011 को ये संपत्ति लौटा दी गयी. जिस कंपनी के साथ एग्रीमेंट था, अचानक 2006 में उस कंपनी का नाम बदल दिया जाता है.नई कागजी कंपनी बनाकर कर की राशि वापस कर दी गयी. यदि षिवनाथ इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड से यह राषि वसूल करना उचित नही था और कोई बकाया नही था तो यह राषि वसूल क्यों की गई थी ? जो कम्पनी 2007 में अस्तित्व में आई वह अस्तित्व में आने के पूर्व ही निर्माण कैसे कर सकती है ? छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नन्द कुमार पटेल ने आरोप लगाया है कि इस कृत्य से छत्तीसगढ़ के राज-कोष को क्षति पहुंचाई गयी है. इस 17 करोड़ 35 लाख की राशि से बाढ़-पीडितो को प्रभावी मदद पहुचाई जा सकती थी. वाणिज्य-कर मंत्री अमर अग्रवाल द्वारा दस्तावेजी प्रमाण देने की चुनौती को स्वीकार करते हुए इन दस्तावेजो को जारी करते हुए एक बयान में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नन्द कुमार पटेल ने यह बात कही.

Tuesday, September 20, 2011

गृह मंत्री कॊ हाउसिंग सॊसाइटी के पीडितॊं ने काले झंडे दिखाए




छत्तीसगढ में पहली बार किसी गृह मंत्री कॊ दिखाए गए काले झंडे