Monday, May 4, 2009

प्रचार का छत्तीसगढ़िया अंदाज

मृगेंद्र पांडेय

छत्तीसगढ़ जसे छोटे और आदिवासी बहुल राज्य में भले ही चुनाव विकास के मुद्दों पर लड़े जाते हों, लेकिन उत्तर प्रदेश के मतदाता चुनाव को जाति के चश्मे से बाहर आकर देखने को तैयार नहीं है। इस कड़वी सच्चाई से छत्तीसगढ़ के नेताओं को उस समय रू-ब-रू होना पड़ा, जब वे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के पक्ष में प्रचार करने के लिए गाजियाबाद आए। यहां इन नेताओं को जातिगत समीकरणों से अवगत होना पड़ा, जो इनके लिए नया था। छत्तीगसढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह और उनके सिपहसलार चाहे पर्यटन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल हों या फिर नगरी निकाय और परिवहन मंत्री राजेश मूढ़त, गाजियाबाद में डेरा डाले हुए हैं और लगातार इन समीकरणों को समझते हुए प्रचार में जुटे हैं।

छत्तीसगढ़ से आए ये भाजपा नेता पूरे छत्तीसगढ़िया अंदाज में प्रचार कर रहे हैं। रोजाना छोटी-छोटी सभाएं करके राजनाथ के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीति के जातीय समीकरण उनको खासे परेशान किए हुए हैं। उन्हें लगता है कि छत्तीसगढ़ में विकास और स्थानीय मुद्दों के आधार पर वोट मांगे जाते हैं। वोट के लिए राजनीतिक दल जाति के हथकंडे का इस्तेमाल कम ही करते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश की सच्चाई इससे परे है।

भाजपा नेता राजेश मूढ़त की माने तो छोटी सभाओं में भी लोग जाति के आधार पर एकत्र होते हैं और वह वोट देने से पहले अपनी जाति के उम्मीदवार को नजरअंदाज नहीं कर सकते। उनका मानना है कि गाजियाबाद में एक बात जो छत्तीसगढ़ से अलग है वह यह कि यहां मुकाबला केवल दो दलों के बीच नहीं होता। उम्मीदवारों की जातियां भी काफी मायने रखती हैं। मतदाता पार्टी को वोट देने से पहले जाति विशेष के उम्मीदवार को प्राथमिकता के रूप में देखते हैं। अलग-अलग जातियों के कई ऐसे नेता भी मैदान में हैं, जो हैं तो निर्दलीय लेकिन उनका मतदाताओं में खासा असर है। बड़ी संख्या में मतदाता उनके साथ खड़े नजर आते हैं।

हालांकि गाजियाबाद में राजनाथ कड़े मुकाबले में फंसे हुए हैं, लेकिन उनके सिपहसलारों का मानना है कि वोटरों की पहली पसंद वही है। इसके पीछे राजनाथ के राष्ट्रीय छवि की बात कही जा रही है। प्रचार के लिए आए छत्तीसगढ़ी नेताओं का असर मतदाताओं पर कितना होता है यह तो सात मई को पता चलेगा, लेकिन इतना तय है कि इन नेताओं ने राजनाथ के पक्ष में हवा बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है।

1 comment:

हर्षवर्धन said...

बड़ी मुश्किल यही है कि पार्टी अध्यक्ष को जिताने के लिए देश भर के बीजेपी नेता गाजियाबाद में जुटे हैं लेकिन, गाजियाबाद के लोग तो राजनाथ के साथ दिखते नहीं।