Wednesday, June 9, 2010

शून्य से शिखर तक तय हुआ सफर

उत्कर्ष शिविर की ऊंची उडान

बांसवाडा। देश में अपनी तरह के कदाचित अनूठे उपक्रम के तहत बांसवाड्ा के पुलिस विभाग द्वारा शिक्षा विभाग के सहयोग से 2007 में जनजाति क्षेत्र की दसवीं कक्षा में शून्य प्रतिशत परिणाम वाली छात्राओं के उन्नयन के लिए प्रारम्भ किया गया शिविर इस अभियान के तीसरे साल शिखर तक का सफर तय करने में कामयाब रहा। सत्र 2007-08 में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के.एल.बैरवा के व्यक्तिगत प्रयासों और विशिष्ट पहल पर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से बांसवाडा शहर में लाकर पढ्ाई जा रही बालिकाओं ने ऐसा परिणाम दिया है जिससे पुलिस और शिक्षा विभाग की बांछे खिली हुई है। इस सत्र में 12 वीं कक्षा में 15 छात्राएं सम्मिलित हुई थी और सभी उत्तीर्ण होकर शत प्रतिशत परिणाम दिया है। यही नही इन्ही छात्राओं में से एक 63 प्रतिशत अंकों के साथ प्रथम श्रेणी में भी उत्तीर्ण हुई है। शेष 14 द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण रही।

कभी ये सिफर के दायरे में थी

सत्र 2007-8 में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक बैरवा जब इन बालिकाओं को लेकर बांसवाडा आए तब ये सभी बालिकाएं 10 व क क्षा में शून्य प्रतिशत परीक्षा परिणाम के साथ अनुत्तीर्ण रही थी। उसी सत्र में यहां लाकर इन छात्राओं के उन्नयन की दिशा में किए गए पहले प्रयास में 48 में से 21 छात्राएं उत्तीर्ण हुई थी। दूसरे वर्ष 16 छात्राओं ने 10 वीं उत्तीर्ण की। जो छात्राएं पहले ही प्रयास में दसवीं उत्तीर्ण हुई वे इस सत्र में 12 वीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल हुई थी। हिन्दी, संस्कृत और गृह विज्ञान विषयों के साथ छात्राओं ने यहां के उत्कर्ष शिविर में पूरी मेहनत से पढाई कर पुलिस और शिक्षा विभाग के प्रयासों और अरमानों को पंख लगा दिए।

अब न रूकी है अब न रूकेंगी

दसवीं फेल होने के बाद आगे पढने का इरादा लगभग छोड चुकी इन छात्राओं के साथ उनके अभिभावकों ने भी इन्हें आगे पढाने के बारे में भी सपने में नहीं सोचा था। लेकिन भारतीय पुलिस सेवा के संवेदनशील अधिकारी के रूप में इन छात्राओं की जिन्दगी में एक ऐसी शख्सियत का सान्निध्य मिला जिनके अभिनव प्रयासों ने इनकी तकदीर बदलने का सिलसिला शुरू कर दिया। के.एल.बैरवा ने इन छात्राओं की अंधेरी जिन्दगी में आशा की रोशनी भर दी। बारहवी कक्षा पास हुई अब ये छात्राएं जोश और उत्साह से लबरेज होकर कहती है कि अब मंजिल पा जाने तक रूकने का नाम नहीं लेंगी। यह उपलब्धि हांसिल करने वाली छात्राओं में कैलाश, सन्तु, मना, सुगना, दुर्गा डामोर, दुर्गा खिहुरी, इन्दिरा, गीता, उषा, ललिता, हीरा, लक्ष्मी तथा रेखा शामिल है।

मिसाल पेश की सास-ससुर ने

इन छात्राओं में दो छात्राएं ऐसी है जिन्हे उत्तकर्ष शिविर में रहते हुए ही वयस्क आयु में परिणय सूत्र में बंधना पडा इसके बावजूद ससुराल वालो ने अपनी बहुओं की पढाई बंद नहीं कराई। यही नही इस सत्र में तीन बार आयोजित अभिभावका सम्मेलन में इन शादी शुदा छात्राओं के सास ससुर भी शामिल हुए। जनजाति विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री महेन्द्रजीत सिंह मालवीया तथा विधायक अर्जुन बामनिया ने बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन दिए जाने हेतु इन सास ससुर का सम्मान भी किया। संगति का असर जीवन में कितना प्रभाव डालता है इसका नमूना भी कीर्तिमान बनाने वाले इस बार के परिणाम में सामने आया। इन छात्राओं की देखरेख के लिए पुलिस विभाग बांसवाडा द्वारा तैनात एक महिला कांस्टेबल ने भी 12 वी कक्षा की यही रहते हुए परीक्षा दी और वह द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण हुई।

खुशी मिली इतनी कि. ..

इस अनूठे अनुष्ठान के प्रणेता और संस्थापक तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के एल बैरवा, वर्तमान पुलिस अधीक्षक गजानन्द वर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक गणेशराम निनामा तथा इस अभियान के समन्वयक प्रकाश पण्डया ने इस उपलब्धि पर अपार हर्ष जताया है और कहा है कि यह सब बालिकाओं की मेहनत का परिणाम है तथा यह उपलब्धि साबित करती है कि जनजाति बहुल बांसवाडा जिले में सेवा भाव से कार्य करने वाले शिक्षकों की कमी नहीं है।

2 comments:

माधव said...

talent are everywhere, the need is to be explore them and their potential

आचार्य जी said...

आईये जानें … सफ़लता का मूल मंत्र।

आचार्य जी